गुरु रविदास
पाठ्यक्रम: GS1/ इतिहास
संदर्भ
- संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष का शुभारंभ गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुआ।
परिचय
- गुरु रविदास 15वीं–16वीं शताब्दी के प्रमुख भक्ति संत, कवि एवं समाज सुधारक थे, जो समानता, भक्ति एवं सामाजिक न्याय के संदेश के लिए प्रसिद्ध हैं।
- उन्हें रविदासिया धर्म का प्रवर्तक माना जाता है।
- जीवन एवं शिक्षाएँ: उन्होंने जाति-आधारित भेदभाव का दृढ़ता से विरोध किया तथा वंचित समुदायों के उत्थान के लिए कार्य किया।
- उन्होंने ‘बेगमपुरा’ (दुःख, भय एवं भेदभाव से मुक्त नगर) की परिकल्पना प्रस्तुत की।
- उन्होंने “मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसी प्रसिद्ध उक्ति के माध्यम से समाज को कर्म, आंतरिक पवित्रता एवं सदाचार का व्यापक संदेश दिया।
- विरासत: उनकी भक्तिमय रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब, जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है, में संकलित हैं।
- हिंदू धर्म की दादूपंथी परंपरा के पंचवाणी ग्रंथ में भी संत रविदास की अनेक रचनाएँ सम्मिलित हैं।
- भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर ने गुरु रविदास द्वारा प्रतिपादित मूल्यों को संवैधानिक सिद्धांतों में अभिव्यक्ति प्रदान की।
स्रोत: AIR
ई-जीरो प्रथम सूचना प्रतिवेदन(FIR) प्रणाली
पाठ्यक्रम: GS2/ भारतीय राजव्यवस्था
संदर्भ
- सरकार ने 18 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में साइबर अपराध से संबंधित मामलों के लिए ई-जीरो प्रथम सूचना प्रतिवेदन(FIR) लागू की है।
परिचय
- ई-जीरो प्रथम सूचना प्रतिवेदन(FIR) एक डिजिटल विधि-प्रवर्तन व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना दर्ज साइबर वित्तीय अपराधों के लिए स्वतः प्रथम सूचना प्रतिवेदन तैयार किया जाता है।
- इस प्रणाली का विकास गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा किया गया है।
- यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(1) पर आधारित है, जिसके अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी जा सकती है, चाहे अपराध कहीं भी घटित हुआ हो।
- यह प्रणाली कैसे कार्य करती है?: पीड़ित राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रतिवेदन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है अथवा 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करता है।
- यदि वित्तीय हानि राज्य द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो संबंधित राज्य के ई-साइबर अपराध पुलिस थाने में स्वतः ई-जीरो प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज हो जाता है; प्रारंभिक चरण में पुलिस थाने जाने की आवश्यकता नहीं होती।
- इसके पश्चात यह प्रथम सूचना प्रतिवेदन तुरंत उस पुलिस थाने को भेज दिया जाता है, जिसके पास मामले का क्षेत्राधिकार होता है।
- शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर संबंधित पुलिस थाने जाकर इसे नियमित प्रथम सूचना प्रतिवेदन में परिवर्तित कराना होता है, जिसके बाद विस्तृत जाँच प्रारंभ की जाती है।
- महत्त्व:
- संघीय व्यवस्था से संबंधित पहलू: संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पुलिस एवं लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं।
- यह प्रणाली राज्यों की स्वैच्छिक भागीदारी के आधार पर केंद्र द्वारा विकसित डिजिटल मंच के माध्यम से संचालित होती है।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की उपयोगिता: यह नवीन आपराधिक विधि सुधारों (दंड प्रक्रिया संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के व्यावहारिक उपयोग का उदाहरण है, जिसका उद्देश्य केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण भी है।
- अपराध नियंत्रण हेतु डिजिटल सुशासन: राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रतिवेदन पोर्टल, अपराध एवं अपराधी निगरानी नेटवर्क एवं प्रणाली तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र का एकीकृत संचालन भारत में विधि-प्रवर्तन हेतु सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना के निर्माण का संकेत देता है।
- संघीय व्यवस्था से संबंधित पहलू: संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पुलिस एवं लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं।
स्रोत: TH
द्वीप्ति योजना (विकेंद्रीकृत महिला सशक्तीकरण: ऊर्जा एवं नीतिगत रूपांतरण के माध्यम से समावेशन)
पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- छत्तीसगढ़ सरकार ने द्वीप्ति योजना (विकेंद्रीकृत महिला सशक्तीकरण : ऊर्जा एवं नीतिगत रूपांतरण के माध्यम से समावेशन) प्रारंभ की है।
परिचय
- यह भारत की प्रथम राज्य स्तरीय नीति है, जिसके अंतर्गत महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक रूप से वितरित नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य शृंखला से जोड़ा गया है।
- यह योजना छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया द्वारा हरित अर्थव्यवस्था संक्रमण मिशन के अंतर्गत संयुक्त रूप से संचालित की जा रही है।
- योजना का उद्देश्य पाँच वर्षों में—
- महिलाओं के नेतृत्व वाले 5,000 नवीकरणीय ऊर्जा उद्यमों की स्थापना,
- 50,000 रोजगार सृजित करना,
- राज्य के 5 लाख परिवारों तथा 10,000 सार्वजनिक संस्थानों तक ऊर्जा की पहुँच सुनिश्चित करना है।
- इस योजना के माध्यम से महिलाओं को छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना, संचालन एवं रखरखाव का तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
- साथ ही, प्रशिक्षित ‘सौर दीदियों’ के समूहों के माध्यम से समुदायों के साथ समन्वय स्थापित कर विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार को बढ़ावा दिया जाता है।
स्रोत: TH
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल एवं पंचायत राज संस्थाओं के लिए आदर्श स्वस्रोत राजस्व नियम
पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ने आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल का शुभारंभ किया तथा पंचायत राज संस्थाओं के लिए आदर्श स्वस्रोत राजस्व नियम जारी किए।
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम
- यह पंचायती राज मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों एवं विकास खंड पंचायतों को स्थानीय परिसंपत्तियों एवं अवसरों की पहचान कर उनका विकास करने में सक्षम बनाना है।
- मंत्रालय के समर्पित तकनीकी सहयोग से इन परिसंपत्तियों एवं अवसरों को बैंक योग्य तथा राजस्व सृजन करने वाली परियोजनाओं में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे पंचायतों के स्वस्रोत राजस्व में सतत वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
- इन परियोजनाओं के वित्तपोषण की व्यवस्था निम्नलिखित माध्यमों से की जाएगी—
- सार्वजनिक–निजी भागीदारी
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत प्राप्त योगदान
- अन्य सरकारी योजनाओं के साथ अभिसरण
- बैंक ऋण
- राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक तथा आवास एवं शहरी विकास निगम इस कार्यक्रम के संस्थागत भागीदार हैं।
- आवेदन हेतु पात्रता—
- ग्राम पंचायतों का न्यूनतम 50 लाख रुपये का स्वस्रोत राजस्व होना चाहिए।
- विकास खंड पंचायतों का न्यूनतम 1 करोड़ रुपये का स्वस्रोत राजस्व होना चाहिए।
- संबंधित पंचायत का कार्यकाल कम-से-कम तीन वर्ष शेष होना चाहिए।
- विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए इन मानदंडों में शिथिलता प्रदान की गई है।
समर्थ पंचायत पोर्टल
- यह पंचायती राज मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी आधारित स्वस्रोत राजस्व प्रबंधन के माध्यम से ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करना है।
- यह पोर्टल ग्राम पंचायतों को स्वस्रोत राजस्व के संपूर्ण चक्र का डिजिटल प्रबंधन करने की सुविधा प्रदान करता है।
- इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्य किए जा सकते हैं—
- करदाताओं का पंजीकरण
- कर मांग का सृजन
- ऑनलाइन भुगतान
- राजस्व संग्रह
- वास्तविक समय में निगरानी
पंचायत राज संस्थाओं के लिए आदर्श स्वस्रोत राजस्व नियम
- पंचायत राज संस्थाओं की वित्तीय स्वायत्तता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए आदर्श स्वस्रोत राजस्व नियम तैयार किए हैं।
- सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर तैयार इन नियमों का उद्देश्य राज्यों को पंचायतों के राजस्व के आकलन, संग्रहण एवं प्रबंधन के लिए पारदर्शी, एकरूप एवं प्रभावी व्यवस्था विकसित करने में सहायता प्रदान करना है।
- इन नियमों में निम्नलिखित राजस्व स्रोतों को सम्मिलित किया गया है—
- संपत्ति कर
- उपयोगकर्ता शुल्क
- विभिन्न प्रकार की फीस
- अन्य गैर-कर राजस्व
स्रोत: pib
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बना
पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- बिम्को–अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी मंडल नाविक कार्यबल रिपोर्ट, 2026 के अनुसार भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बन गया है।
परिचय
- भारत वैश्विक जहाजरानी उद्योग को 3,11,936 समुद्री पेशेवर उपलब्ध कराता है।
- वैश्विक नाविक कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी 12.16% है।
- इस आधार पर भारत का स्थान फिलीपींस के बाद दूसरा है, जबकि चीन, रूस तथा इंडोनेशिया इसके बाद आते हैं।
- अधिकारी श्रेणी में भारत की स्थिति विशेष रूप से मजबूत है, जहाँ विश्व के कुल अधिकारी कार्यबल में इसकी हिस्सेदारी 13.41% है।
- वैश्विक स्तर पर नाविकों की उपलब्धता 25.7 लाख है, जबकि उनकी मांग 25.5 लाख तक पहुँच चुकी है, जिससे वैश्विक श्रम बाजार में कुशल नाविकों की कमी स्पष्ट होती है।
भारत का लक्ष्य
- भारत का लक्ष्य वैश्विक नाविक कार्यबल में अपनी हिस्सेदारी 12.16% से बढ़ाकर 20% करना है।
- महत्त्व: वैश्विक जहाजरानी उद्योग में योग्य अधिकारियों की निरंतर कमी को देखते हुए भारत की बढ़ती समुद्री शिक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण प्रणाली तथा प्रगतिशील नीतिगत ढाँचा भविष्य की वैश्विक मांग को पूरा करने की दिशा में भारत को मजबूत स्थिति प्रदान करता है।
स्रोत: AIR
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण
समाचार में
- प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके तहत 39.7 लाख छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियाँ स्थापित की जा चुकी हैं तथा 27,343.9 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता के माध्यम से 48 लाख परिवारों को लाभ प्राप्त हुआ है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
- इस योजना का शुभारंभ वर्ष 2024 में 75,021 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ किया गया।
- यह विश्व का सबसे बड़ा घरेलू छत-आधारित सौर ऊर्जा कार्यक्रम बन चुका है।
- योजना के अंतर्गत 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से 2 लाख रुपये तक के बिना जमानत ऋण पर 6.75% की रियायती ब्याज दर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे इसकी स्वीकार्यता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- राष्ट्रीय पोर्टल पर 1 करोड़ से अधिक परिवारों ने पंजीकरण कराया है तथा मई 2026 तक 33 लाख से अधिक छत-आधारित सौर ऊर्जा प्रणालियाँ स्थापित की जा चुकी हैं, जिससे 12 गीगावाट से अधिक क्षमता जुड़ी है।
- वर्तमान में छत-आधारित सौर ऊर्जा, आवासीय सौर क्षमता का लगभग 45% हिस्सा है तथा वर्ष 2024–2026 के दौरान इसकी स्थापना दर में 85% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- जून के अंत तक भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता (जिसमें उपयोगिता-स्तरीय, छत-आधारित तथा ग्रिड से पृथक परियोजनाएँ सम्मिलित हैं) 162.15 गीगावाट रही।
- यह योजना वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही है।
- मार्च 2026 तक भारत की कुल सौर ऊर्जा क्षमता 150 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। साथ ही, यह योजना ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने तथा विद्युत वितरण कंपनियों पर सब्सिडी के भार को कम करने में भी सहायक है।
स्रोत: TH
एंड्रोमेडा आकाशगंगा
पाठ्यक्रम: GS3/ अंतरिक्ष
समाचार में
- खगोलविदों ने हबल अंतरिक्ष दूरबीन से प्राप्त आँकड़ों का उपयोग कर विगत 50 करोड़ वर्षों के दौरान एंड्रोमेडा आकाशगंगा में तारों के निर्माण का अब तक का सबसे विस्तृत मानचित्र तैयार किया है।
एंड्रोमेडा आकाशगंगा
- इसे मेसियर 31 (एम31) के नाम से भी जाना जाता है।
- यह एक सर्पिल आकाशगंगा है, जो पृथ्वी से लगभग 25 लाख प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है।
- यह आकाशगंगा (मिल्की वे) के सबसे निकट स्थित सर्पिल आकाशगंगा है।
- यह अंधकारमय आकाश में नंगी आँखों से दिखाई देने वाली सबसे दूरस्थ खगोलीय वस्तु है।
- इसका आभासी परिमाण 3.1 है, जिसके कारण यह अंधकारमय अथवा मध्यम प्रकाश प्रदूषण वाले आकाश में नंगी आँखों से देखी जा सकती है।
- इस आकाशगंगा का प्रथम लिखित वर्णन फ़ारसी खगोलविद अब्द अल-रहमान अल-सूफ़ी ने वर्ष 964 ईस्वी में अपनी पुस्तक ‘स्थिर तारों का ग्रंथ’ में किया था।
स्रोत: TH
बुकर पुरस्कार 2026
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- बुकर पुरस्कार 2026 की दीर्घसूची घोषित कर दी गई है, जिसमें रोमांचक साहित्य, दुष्टोपियाई विज्ञान कथा तथा प्रेम कथाओं सहित विभिन्न विधाओं की 13 पुस्तकें सम्मिलित हैं।
बुकर पुरस्कार के बारे में
- बुकर पुरस्कार प्रतिवर्ष उस लेखक को प्रदान किया जाता है, जिसकी अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित पुस्तक 1 अक्टूबर से 30 सितंबर के बीच यूनाइटेड किंगडम और/या आयरलैंड में प्रकाशित हुई हो।
- अंतिम सूची में चयनित प्रत्येक छह लेखक को 2,500 पाउंड स्टर्लिंग प्रदान किए जाते हैं, जबकि विजेता को 50,000 पाउंड स्टर्लिंग का पुरस्कार दिया जाता है।
- वर्ष 2025 का बुकर पुरस्कार डेविड स्ज़ाले को उनके उपन्यास ‘फ्लेश’ के लिए प्रदान किया गया।
- बुकर पुरस्कार प्राप्त भारतीय लेखक:
- अरुंधति रॉय — द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स
- किरण देसाई — द इनहेरिटेंस ऑफ़ लॉस
- अरविंद अडिगा — द व्हाइट टाइगर
अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार
- पूर्व में इसे मैन बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के नाम से जाना जाता था।
- यह पुरस्कार प्रतिवर्ष ऐसे कथा साहित्य (उपन्यास अथवा लघुकथा-संग्रह) के लिए प्रदान किया जाता है, जो मूल रूप से अंग्रेज़ी के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में लिखा गया हो, बाद में उसका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया हो तथा वह यूनाइटेड किंगडम और/या आयरलैंड में प्रकाशित हुआ हो।
- यह पुरस्कार अनुवादकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को भी मान्यता देता है।
- 50,000 पाउंड स्टर्लिंग की पुरस्कार राशि लेखक एवं अनुवादक के बीच समान रूप से विभाजित की जाती है।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 29-07-2026